भारतीय मुद्रा बाजार में सोमवार को बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया 96.20 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा है।
सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है। दूसरी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी भारतीय मुद्रा को कमजोर किया है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यदि वैश्विक तनाव कम होता है और विदेशी निवेश दोबारा बढ़ता है, तो रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों पर बनी हुई है।
FAQ
प्रश्न: रुपया 96.20 प्रति डॉलर क्यों गिरा?
उत्तर: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डॉलर की मजबूती इसकी मुख्य वजह हैं।
प्रश्न: क्या रुपये की कमजोरी से महंगाई बढ़ सकती है?
उत्तर: हां, आयात महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
प्रश्न: क्या RBI हस्तक्षेप कर सकता है?
उत्तर: जरूरत पड़ने पर भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।











