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पाकिस्तान जल संकट: भारत नहीं, जल प्रबंधन बना बड़ी वजह

सिंधु नदी, जलाशय और बहते पानी को दर्शाती एक हाई-रिज़ॉल्यूशन सांकेतिक तस्वीर, जो पाकिस्तान जल संकट और जल प्रबंधन की स्थिति को दर्शाती है।

पाकिस्तान जल संकट को लेकर भारत पर लगातार आरोप लगाए जाते रहे हैं, लेकिन उपलब्ध जल आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2025 में सिंधु बेसिन में पानी की उपलब्धता अनुमान से अधिक रही।

इसके बावजूद बड़ी मात्रा में पानी अरब सागर में बह गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि समस्या केवल पानी की कमी नहीं बल्कि जल प्रबंधन की भी है।

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पूर्व जल विशेषज्ञों के मुताबिक खरीफ सीजन में जल आवक अनुमान से करीब 18 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई।

वहीं प्रमुख जलाशय लगभग 99 प्रतिशत क्षमता तक भर गए।

यदि वास्तविक संकट होता, तो इतनी बड़ी मात्रा में पानी समुद्र में नहीं जाने दिया जाता।

यही कारण है कि पाकिस्तान को जल संकट को केवल भारत की परियोजनाओं से जोड़ना उचित नहीं माना जा रहा है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि चिनाब जैसी हिमालयी नदियों का बहाव मौसम, बर्फ पिघलने और प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है।

रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाओं में गाद की सफाई और रखरखाव के दौरान पानी के प्रवाह में अस्थायी बदलाव सामान्य प्रक्रिया है।

इसलिए हर उतार-चढ़ाव को हस्तक्षेप का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

FAQ (हिंदी)

Q1. क्या पाकिस्तान जल संकट के लिए भारत को जिम्मेदार मानता है?

उपलब्ध जल आंकड़ों के अनुसार केवल भारत को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

Q2. पाकिस्तान में पानी समुद्र में क्यों बह जाता है?
विशेषज्ञों के अनुसार सीमित भंडारण क्षमता और कमजोर जल प्रबंधन इसके प्रमुख कारण हैं।