India Hydrogen Train :- भारत ने रेल परिवहन के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही भारत अब जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों की उस विशिष्ट सूची में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन आधारित ट्रेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के स्वच्छ, हरित और टिकाऊ परिवहन प्रणाली विकसित करने के प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल होती हैं, क्योंकि इनके संचालन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। ईंधन सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है और उप-उत्पाद के रूप में केवल जल (पानी) निकलता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी तथा अपने मार्ग में 14 स्टेशनों पर रुकेगी। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय रेलवे को भविष्य की हरित तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है।
रेल मंत्रालय का मानना है कि हाइड्रोजन तकनीक अपनाने से डीजल पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण में कमी आएगी और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। भविष्य में देश के अन्य मार्गों पर भी ऐसी ट्रेनों के संचालन की योजना पर काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन ईंधन आधारित रेल प्रणाली जलवायु परिवर्तन से निपटने और नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत का इस तकनीक को अपनाना वैश्विक स्तर पर हरित परिवहन की दिशा में उसकी बढ़ती प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है.














