Hydrogen Train :- भारतीय रेलवे ने हरित और आधुनिक परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को नियमित यात्री सेवा में शामिल कर दिया है। उत्तर रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन 19 जुलाई से हरियाणा के जींद-सोनीपत-जींद रेलखंड पर सप्ताह में छह दिन यात्रियों को लेकर चलेगी। इस उपलब्धि के साथ भारत हाइड्रोजन ईंधन आधारित रेल सेवाएं संचालित करने वाले चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है।
यह अत्याधुनिक ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसमें डीजल इंजन की जगह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में धुएं की बजाय केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है, जिससे यह लगभग शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) वाली रेल सेवा बन जाती है।
करीब 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर चलने वाली यह ट्रेन लगभग दो घंटे में अपनी यात्रा पूरी करेगी। ट्रेन में आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और यह एक बार में लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। इस परियोजना के लिए जींद में विशेष हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन भी विकसित किया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना भारत की हरित ऊर्जा नीति और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि यह सेवा सफल रहती है तो भविष्य में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि भविष्य की स्वच्छ और टिकाऊ रेल परिवहन व्यवस्था की मजबूत नींव भी रखेगा। आने वाले वर्षों में ऐसी ट्रेनों का विस्तार देश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है।















