महाकुंभ के जल की गुणवत्ता पर सीएम योगी का बयान – स्नान और आचमन के लिए उपयुक्त, यूपी पीसीबी कर रहा मॉनिटरिंग
दिनाँक 20/02/2025 नई दिल्ली
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ को लेकर संगम के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे थे। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में जवाब देते हुए कहा कि संगम का पानी पूरी तरह से साफ और सुरक्षित है। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) लगातार पानी की गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है और इसे स्नान और आचमन के लिए उपयुक्त पाया गया है।
सीएम योगी ने क्या कहा?
- संगम और उसके आसपास के सभी नाले और पाइप टेप कर दिए गए हैं, जिससे गंदगी नदी में न जाए।
- पानी को शुद्ध करके ही नदी में छोड़ा जा रहा है।
- पानी की गुणवत्ता के ताजा आंकड़ों के मुताबिक:
- बीओडी (Biochemical Oxygen Demand) 3 से कम है (जो पानी की स्वच्छता दर्शाता है)।
- घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) 8-9 है, जो पानी की अच्छी स्थिति को दिखाता है।
- पानी न केवल स्नान बल्कि आचमन (पीने) के लिए भी उपयुक्त है।
प्रदूषण को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि संगम के पानी में फेकल कोलीफॉर्म (मानव और पशु अपशिष्ट से जुड़ा बैक्टीरिया) अधिक पाया गया। इस पर सीएम योगी ने कहा कि यह स्तर स्वीकार्य सीमा के भीतर है और प्रयागराज में इसका स्तर 100ml में 2,500 MPN से कम है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग महाकुंभ को बदनाम करने के लिए झूठा प्रचार कर रहे हैं। NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) ने भी पुष्टि की है कि संगम के पानी में प्रदूषण का स्तर नियमित मानकों के भीतर है।
CPCB की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 12-13 जनवरी 2025 की रिपोर्ट में बताया था कि कुछ जगहों पर स्नान के मानकों से पानी की गुणवत्ता थोड़ी कम थी, लेकिन बाद में पानी में सुधार हुआ।
- 19 जनवरी को लॉर्ड कर्जन ब्रिज के पास पानी की गुणवत्ता थोड़ी प्रभावित हुई थी।
- महाकुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के स्नान से पानी में मल प्रदूषण बढ़ सकता है।
पानी को साफ रखने के लिए क्या कदम उठाए गए?
- प्रयागराज में 21 नालों को टेप किया गया और जियो-ट्यूब सिस्टम के जरिए शुद्ध किया गया।
- सात जियोसिंथेटिक डीवाटरिंग ट्यूब (जियो-ट्यूब) के माध्यम से पानी की शुद्धि की जा रही है।
- CPCB की टीम ने 6-8 जनवरी और 18-19 जनवरी को जांच की थी।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मानकों पर पानी पूरी तरह खरा नहीं उतरा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की 55वीं बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी।
निष्कर्ष
सरकार का दावा है कि निगरानी और शुद्धिकरण की प्रक्रिया से संगम का पानी पूरी तरह साफ है और श्रद्धालु निर्भय होकर स्नान व आचमन कर सकते हैं। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं भी जताई गई हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
