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खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं इटावा के किसान

“किसानों का कहना है कि डीएपी खाद न मिलने की वजह से आलू, लहसुन, सरसों सहित कई फसलों में बड़ा नुकसान होगा, दूसरी खाद की बोरियां मिल रही हैं जो कि फसलों के लिए ठीक नहीं हैं”

जनपद इटावा के किसान खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं ।  जनपद में समितियां पर खाद न होने की वजह से दूर-दूर से आए किसान दिन भर चक्कर लगाते रहते हैं लाइनों में खड़े रहते हैं लेकिन उनको खाद नहीं मिलती है। खाद की किल्लत होने के कारण ब्लैक मार्केट सक्रिय हो गया है। किसानों का कहना है कि डीएपी खाद न मिलने की वजह से आलू, लहसुन, सरसों सहित कई फसलों में बड़ा नुकसान होगा, दूसरी खाद की बोरियां मिल रही हैं जो कि फसलों के लिए ठीक नहीं हैं, खाद की बोरियों के साथ अन्य सामान जबरदस्ती दिया जा रहा है, जिसकी फसलों में जरूरत भी नहीं हैं। इसलिए समस्याएं अधिक हैं। शहर में स्थित नई मंडी में बने इफको सेंटर पर पहुंचे बीस किलोमीटर दूर से आए लवेदी चंद पूरा निहाल के निवासी किसान जागरण कुमार ने बताया कि उनके पास 58 बीघा खेत है, बीस बोरी खाद की जरूरत है लेकिन एक भी बोरी नहीं मिली है,

कई दिनों से समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, फसलों के सीजन में कहीं न कहीं ब्लैक के माफिया सक्रिय हो गए हैं, प्राइवेट ब्लैक में बहुत अधिक कीमत पर मिल रही है, आलू की फसल कर रहे हैं,  डीएपी खाद और अन्य खाद में फर्क है। बीस किलोमीटर दूर से आए किसान मुकेश कुमार ने बताया कि डीएपी खाद नहीं मिल रही है, आलू, लहसुन, सरसों की फसल के लिए खाद की जरूरत है, यदि खाद नहीं मिलेगी तो पैदावार में 40 प्रतिशत का नुकसान होगा। हमारे पास बीस बीघा खेत है 8 बोरी खाद की जरूरत है। पंद्रह दिनों से चक्कर लगा रहे हैं उपलब्ध नहीं है। जिलाधिकारी अवनीश राय ने बताया कि IFMS पोर्टल पर पूरे जिले का आवंटन देख सकते हैं, खाद जहां बट रही है, एसडीएम सभी जगह देख रहे हैं जहां अनियमितता मिलेगी उस पर कार्यवाही की जाएगी, डिमांड और सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं हैं, भविष्य के लिए शुरुआत से मैनेजमेंट कर रहे हैं, जहां से शिकायत मिल रही है वहां कार्यवाही हो रही है, हमारा उद्देश्य है कि खाद हमारे यहां से गलत तरीके से दूसरे राज्य और जिलों में न जा पाए, प्रत्येक ब्लॉक में हम लोग समय समय पर वेरिफिकेशन करवाते रहते हैं।