मतदाता सूची संशोधन को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण के तहत मिजोरम, ओडिशा, मणिपुर और सिक्किम की मसौदा मतदाता सूची से करीब 22 लाख नाम हटाए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के अनुसार इन चार राज्यों में पहले लगभग 3.68 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जो अब घटकर 3.46 करोड़ रह गए हैं। सबसे अधिक 20.11 लाख नाम ओडिशा से हटे हैं। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल मसौदा सूची है और पात्र नागरिक अंतिम सूची जारी होने से पहले अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। Jai Sharma | Satvik Samachar के अनुसार यह प्रक्रिया चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची को अद्यतन रखने का हिस्सा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित या दोहराए गए मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना है। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इससे कुछ वर्गों के मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि सभी दावे और आपत्तियां नियमानुसार स्वीकार की जाएंगी और अंतिम मतदाता सूची पूरी जांच के बाद जारी होगी। आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया का असर कई राज्यों की चुनावी राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
FAQ
प्रश्न 1: मतदाता सूची संशोधन क्या है?
उत्तर: यह चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया है।
प्रश्न 2: कितने नाम हटाए गए हैं?
उत्तर: चार राज्यों की मसौदा सूची से लगभग 22 लाख नाम हटाए गए हैं।
प्रश्न 3: क्या हटे हुए नाम दोबारा जुड़ सकते हैं?
उत्तर: हां, पात्र नागरिक दावा और आवश्यक दस्तावेज देकर अंतिम सूची से पहले अपना नाम जुड़वा सकते हैं।











