ईरान में अयातुल्ला खामेनेई की अपील: तेहरान की ग्रैंड मस्जिद से मुसलमानों को एकजुट होने और इजरायल को कड़ा संदेश देने का आह्वान
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने हाल ही में तेहरान की ग्रैंड मस्जिद से मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की और इजरायल को कड़ा संदेश भेजा। पांच साल बाद अपनी पहली सार्वजनिक स्पीच में, खामेनेई ने विशेष तौर पर इजरायल और फिलिस्तीनी संघर्ष के मुद्दे पर अपनी राय रखी। उनका संबोधन तब हुआ है, जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है, और पूरे मध्य पूर्व में बढ़ती हिंसा और संघर्ष की खबरें आ रही हैं।
मुसलमानों से एकजुट होने की अपील: अयातुल्ला खामेनेई ने अपने भाषण में पूरी मुस्लिम दुनिया को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस्लामी राष्ट्रों के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपनी ताकत को संगठित करें और अपने साझा दुश्मन के खिलाफ एकजुट खड़े हों। उनका इशारा सीधे इजरायल की ओर था, जिसे वे लंबे समय से मुस्लिम दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।
उन्होंने कहा, “इस्लामी दुनिया में जो भी आपसी संघर्ष और मतभेद हैं, वे हमें कमजोर कर रहे हैं। अगर मुसलमान एक साथ खड़े होंगे, तो दुनिया की कोई भी ताकत हमें रोक नहीं पाएगी। इजरायल जैसे दुश्मनों के खिलाफ एकजुटता से ही हम अपनी ताकत बढ़ा सकते हैं।”
फिलिस्तीन के प्रति समर्थन: खामेनेई ने अपने भाषण में फिलिस्तीनी मुद्दे पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन मुस्लिम दुनिया का दिल है, और जब तक फिलिस्तीन मुक्त नहीं होता, तब तक इस्लामी दुनिया में शांति नहीं आ सकती। उन्होंने फिलिस्तीनी लोगों के संघर्ष का समर्थन जारी रखने की बात कही और इजरायल को उनके अत्याचारों के लिए जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलिस्तीन की मुक्ति और इजरायल के खिलाफ संघर्ष इस्लामी राष्ट्रों का कर्तव्य है। ईरान लंबे समय से फिलिस्तीनी गुटों, विशेष रूप से हमास और इस्लामिक जिहाद, को समर्थन देता आ रहा है, और इस बार भी खामेनेई ने उस समर्थन की पुष्टि की।
इजरायल के लिए कड़ा संदेश: अपने संबोधन के दौरान, अयातुल्ला खामेनेई ने इजरायल को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि “इजरायल ने जो अत्याचार किए हैं, उसके लिए उसे एक दिन बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” खामेनेई ने इजरायल के खिलाफ सभी मुस्लिम देशों से मिलकर रणनीति बनाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि “इजरायल का अंत निकट है,” और इसके खिलाफ संघर्ष को जारी रखने की अपील की।
उनका इशारा इजरायल और फिलिस्तीनी संघर्ष के हालिया घटनाक्रम की ओर था, जिसमें इजरायल और हमास के बीच बढ़ती हिंसा और संघर्ष देखने को मिल रहा है। खामेनेई ने इस संघर्ष में फिलिस्तीनियों के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रति नाराजगी: खामेनेई ने अपने भाषण में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से पश्चिमी देशों और संयुक्त राष्ट्र, की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय संस्थान और पश्चिमी देश इजरायल को समर्थन दे रहे हैं और उसकी हरकतों को अनदेखा कर रहे हैं।” उन्होंने मुस्लिम देशों से आग्रह किया कि वे पश्चिमी शक्तियों पर भरोसा न करें और अपने हितों की रक्षा खुद करें।
ईरान की सेना और क्षेत्रीय भूमिका: खामेनेई ने ईरानी सेना और उसके सहयोगियों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत और रणनीतिक योजनाएं इस्लामी दुनिया के लिए एक सुरक्षा कवच हैं। उनका कहना था कि ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत किया है ताकि वे अपने दुश्मनों, विशेष रूप से इजरायल और उसके सहयोगियों, का मुकाबला कर सकें।
