दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर हंगामा, शिक्षा मंत्री और ‘आप’ आमने-सामने
दिनाँक 08/04/2025 नई दिल्ली
दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। राज्य के नए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि उनके कार्यकाल में आंखें मूंदकर फीस बढ़ोतरी को नजरअंदाज किया गया।
मंत्री का आरोप: कई स्कूलों में भारी भ्रष्टाचार
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली में कुल 1,677 निजी स्कूल हैं, जिनमें से 335 सरकारी ज़मीन पर बने हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन स्कूलों की सूची तैयार कर ली है जिन्होंने बिना अनुमति फीस बढ़ाई, और अब उनका निरीक्षण और ऑडिट कराया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- एहल्कन इंटरनेशनल स्कूल में ₹15 करोड़ का घोटाला हुआ, इसके बावजूद इसे 15% और फिर 13% फीस बढ़ाने की इजाजत मिली।
- एंजल पब्लिक स्कूल ने 2022-23 में 14% फीस बढ़ाई, लेकिन कोई जांच नहीं हुई।
- सलवान पब्लिक स्कूल पर ₹1.66 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है और उसने 2023-24 में 23.84% और 2024-25 में 14.68% फीस बढ़ा दी।
- लांसर्स कॉन्वेंट स्कूल ने ₹4 करोड़ भ्रष्टाचार के बावजूद 2024-25 में 34% फीस बढ़ा दी।
उन्होंने बताया कि रेकॉर्ड के मुताबिक, पिछले 10 सालों में सिर्फ 75 स्कूलों का ही ऑडिट हुआ है, लेकिन अब सीएम रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी जो सभी स्कूलों का ऑडिट करेगी और गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
‘आप’ का पलटवार: भाजपा के शासन में स्कूलों ने लूट मचाई
वहीं, आप पार्टी की नेता आतिशी ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई। उन्होंने कहा कि: भाजपा की सरकार आते ही स्कूलों ने लूट शुरू कर दी है। न कोई निगरानी, न कोई नियंत्रण। आतिशी ने दावा किया कि ‘आप’ की सरकार के समय फीस बढ़ोतरी पर सख्त नियंत्रण था, और ऑडिट में गड़बड़ी पाए जाने पर स्कूलों को एक्स्ट्रा वसूली गई फीस वापस करनी पड़ती थी।
निष्कर्ष
अब दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर राजनीति गरमा गई है। एक ओर नई सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप लगा रही है, वहीं ‘आप’ का कहना है कि उनके कार्यकाल में स्कूलों पर निगरानी मजबूत थी। आने वाले समय में सभी स्कूलों का ऑडिट और उसके नतीजे इस विवाद का अगला बड़ा मोड़ बन सकते हैं।
