देश में लंबे समय से कई पेशे पारंपरिक नामों से जाने जाते हैं। अब इन्हीं नामों को बदलकर अधिक आधुनिक और कौशल आधारित पहचान देने की चर्चा शुरू हो गई है। हाल ही में संसदीय समिति की रिपोर्ट में पारंपरिक पेशों के नाम बदलने का प्रस्ताव सामने आया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि जाति से जुड़े पुराने शब्दों की जगह ऐसे नाम दिए जाएं जो पेशे की विशेषज्ञता और कौशल को दर्शाएं।
समिति का मानना है कि कई पारंपरिक नाम सामाजिक रूढ़ियों से जुड़े हुए हैं। इससे कई बार युवा इन पेशों को अपनाने से बचते हैं। इसलिए पारंपरिक पेशों के नाम बदलने का प्रस्ताव पेश किया गया है ताकि इन व्यवसायों को नई और सम्मानजनक पहचान मिल सके।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ पेशों के संभावित नए नाम भी सुझाए गए हैं। उदाहरण के लिए मोची को जूता कारीगर या फुटवियर तकनीशियन कहा जा सकता है। इसी तरह नाई को पर्सनल केयर सर्विस प्रोवाइडर कहा जा सकता है। कुम्हार को मिट्टी उत्पाद निर्माता और धोबी को लॉन्ड्री सर्विस प्रोवाइडर के रूप में पहचान दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह बदलाव लागू होता है तो इससे कौशल आधारित रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही युवाओं के बीच इन पारंपरिक व्यवसायों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो सकती है।
यह रिपोर्ट सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय को भेजी गई है। आगे सरकार और संबंधित मंत्रालय इस पर विचार कर सकते हैं।
Abhishek Gautam | Abhishek Gautam
FAQ
प्रश्न 1: पारंपरिक पेशों के नाम बदलने का प्रस्ताव क्या है?
यह प्रस्ताव पारंपरिक पेशों को जाति आधारित नामों से हटाकर आधुनिक और कौशल आधारित नाम देने से जुड़ा है।
प्रश्न 2: किन पेशों के नाम बदलने की चर्चा है?
मोची, नाई, कुम्हार और धोबी जैसे पेशों के नाम बदलने का सुझाव दिया गया है।
प्रश्न 3: इसका उद्देश्य क्या है?
उद्देश्य सामाजिक रूढ़ियों को कम करना और कौशल आधारित रोजगार को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 4: क्या यह बदलाव अभी लागू हो गया है?
नहीं, फिलहाल यह संसदीय समिति का प्रस्ताव है। अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।











