उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी, 18 फेलो और 1 कोऑर्डिनेटर की होगी नियुक्ति
दिनाँक 18/04/2025 नई दिल्ली
लखनऊ, अप्रैल: योगी सरकार उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है। इसके तहत एक खास योजना शुरू की जा रही है, जिसमें 18 ईको टूरिज्म फेलो और 1 प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय समुदायों को रोजगार और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी है।
हाल ही में इस योजना की विस्तृत कार्ययोजना मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के सामने प्रस्तुत की गई है। शासन से हरी झंडी मिलते ही इस कार्यक्रम को लागू कर दिया जाएगा।
क्या काम करेंगे चयनित फेलो?
चयनित फेलो और कोऑर्डिनेटर राज्य के विभिन्न ईको टूरिज्म स्थलों पर काम करेंगे। इनके प्रमुख कार्य होंगे:
- ईको टूरिज्म परियोजनाओं को लागू करना
- स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण और जागरूकता देना
- पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार
- जरूरी सुविधाओं की पहचान और सुधार
- सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों से समन्वय
- परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखना
- पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना
कैसे होगा चयन?
इस योजना के तहत चयन प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्ता आधारित होगी। फेलो बनने के लिए उम्मीदवार के पास पर्यावरण विज्ञान, वानिकी, पारिस्थितिकी या संबंधित क्षेत्र में 60% अंकों के साथ मास्टर डिग्री होनी चाहिए।
उन्हें MS Word, Excel, PowerPoint का ज्ञान और हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अच्छी पकड़ होनी चाहिए। आयु सीमा 23 से 40 वर्ष के बीच रखी गई है।
कितना मिलेगा स्टाइपेंड?
- चयनित फेलो को ₹30,000 प्रति माह स्टाइपेंड मिलेगा
- इसके अलावा ₹10,000 यात्रा भत्ता भी मिलेगा
- इस योजना पर सालाना लगभग ₹91.20 लाख खर्च होगा, जिसमें प्रशिक्षण लागत अलग से होगी
- योजना की अवधि 1 वर्ष की होगी, जिसे जरूरत पड़ने पर एक और वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है
रोजगार और पर्यावरण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस पहल से उत्तर प्रदेश को ईको टूरिज्म हब बनाने में मदद मिलेगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाएं न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक भी बनाती हैं।
यह कदम उत्तर प्रदेश को देश का एक प्रमुख ईको टूरिज्म गंतव्य बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
