कल्याण-डोंबिवली मेयर राजनीति में बड़ा उलटफेर, MNS ने शिंदे गुट को दिया समर्थन
कल्याण-डोंबिवली मेयर राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। नगर निगम चुनाव के बाद सत्ता गठन को लेकर जो तस्वीर साफ मानी जा रही थी, वह अब बदलती दिख रही है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन देकर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। इस फैसले को सीधे तौर पर राज ठाकरे की रणनीतिक राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। एमएनएस के पूर्व विधायक प्रमोद राजू पाटिल ने स्पष्ट किया कि पार्टी के पांचों नगरसेवकों ने शहर के विकास को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। उनके समर्थन से शिंदे गुट की शिवसेना की संख्या 58 तक पहुंच गई है, जिससे KDMC में उनकी स्थिति मजबूत हो गई है। वहीं, इस घटनाक्रम को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी इस समर्थन की पुष्टि करते हुए कहा कि महायुति के तहत ही मेयर चुना जाएगा। भाजपा द्वारा ढाई-ढाई साल के मेयर फॉर्मूले की चर्चा भी सियासी गलियारों में तेज है। Satvik Samachar के अनुसार, आने वाले दिनों में केडीएमसी की सत्ता तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. कल्याण-डोंबिवली मेयर राजनीति में MNS ने किसे समर्थन दिया है?
MNS ने शिवसेना (शिंदे गुट) को समर्थन देने का फैसला किया है।
Q2. MNS के समर्थन से शिंदे गुट को क्या फायदा हुआ?
पांच नगरसेवकों के समर्थन से उनकी संख्या बढ़कर 58 हो गई है।
Q3. क्या KDMC में मेयर महायुति से बनेगा?
हां, शिंदे गुट और भाजपा की महायुति से मेयर बनने की संभावना है।
