बिहार कांग्रेस को नया अध्यक्ष, दलित नेता राजेश कुमार को मिली जिम्मेदारी
दिनाँक 20/03/2025 नई दिल्ली
बिहार कांग्रेस ने रणनीतिक कदम उठाते हुए कुटुम्बा से विधायक और दलित नेता राजेश कुमार को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत करने के मकसद से यह फैसला लिया गया है। इसको लेकर राजेश कुमार ने पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात कर चुनावी तैयारियों पर चर्चा की।
दलित नेता को नेतृत्व देने का बड़ा संकेत
राजेश कुमार की नियुक्ति उच्च जाति के नेता अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह की गई है। इससे कांग्रेस का इरादा साफ है—वह हाशिए पर खड़े समुदायों को साधना चाहती है। पार्टी, जाति जनगणना की मांग और संविधान बचाने जैसे मुद्दों पर जनता से जुड़ने की रणनीति बना रही है।
बिहार कांग्रेस में युवा नेताओं की नई तिकड़ी
राजेश कुमार के नेतृत्व में अब बिहार कांग्रेस में एक नई युवा तिकड़ी बन गई है। इसमें कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार शामिल हैं। इसके साथ ही, कांग्रेस ने कृष्णा अल्लावरु को बिहार के लिए एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया है, ताकि पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सहयोगी से ज्यादा मजबूत स्वतंत्र पहचान दी जा सके।
“एनडीए सरकार की विफलताओं को उजागर करेंगे”
राजेश कुमार ने कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा,
“मुझ पर भरोसा जताने के लिए मैं पार्टी का आभारी हूं। मेरी दो मुख्य प्राथमिकताएं होंगी—कांग्रेस के संगठन को मजबूत करना और एनडीए सरकार की विफलताओं को उजागर करना।” उन्होंने बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर कांग्रेस का रोडमैप तैयार करने की बात भी कही।
राजनीतिक सफर: संघर्ष से मिली सफलता
राजेश कुमार ने पहली बार 2005 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए। 2010 में कांग्रेस के टिकट पर भी असफल रहे। लेकिन 2015 में उन्होंने जीत दर्ज कर अपनी पहचान बनाई। 2020 के चुनाव में जब पूरे बिहार में एनडीए की लहर थी, तब भी उन्होंने अपनी कुटुम्बा सीट बरकरार रखी।
राजनीतिक समीकरण और आरजेडी पर असर
राजेश कुमार की नियुक्ति को राजद प्रमुख लालू प्रसाद के प्रभाव को रोकने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उनके पूर्ववर्ती अखिलेश प्रसाद सिंह लालू के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस अब बिहार में स्वतंत्र और आक्रामक राजनीति करने की तैयारी में है।
अशोक चौधरी की ‘गलतियों’ को सुधारने की कोशिश?
राजेश कुमार को अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे एक और वजह बताई जा रही है—अशोक चौधरी के दौर में हुई गलतियों को सुधारना। चौधरी 2013 से 2017 तक बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष थे, लेकिन उन पर पार्टी में गुटबाजी बढ़ाने का आरोप लगा। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर जेडीयू जॉइन कर ली और अब नीतीश कुमार सरकार में मंत्री हैं।
बिहार में कांग्रेस की नई रणनीति
राजेश कुमार की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति से साफ है कि कांग्रेस बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए दलित समुदाय को साधने और एनडीए के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की रणनीति बना रही है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस नए नेतृत्व के साथ आने वाले चुनावों में कितनी मजबूती से खड़ी हो पाती है।
