सोशल मीडिया पर बच्चों को पैरेंट्स की मंजूरी जरूरी, डेटा सुरक्षा बिल में अहम प्रावधान
“डिजिटल डेटा संरक्षण विधेयक 2023 को संसद से मंजूरी मिलने के 14 महीने बाद मसौदा नियम जारी किए गए हैं। इन नियमों में व्यक्ति की स्पष्ट सहमति लेने के लिए एक प्रक्रिया बनाई गई है। साथ ही, बच्चों के डेटा का उपयोग करने के लिए माता-पिता की अनुमति अनिवार्य होगी।”
दिनाँक 03/01/2025
नई दिल्ली: सरकार ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियमों का बहुप्रतीक्षित मसौदा जारी कर दिया है। इसमें नियमों के उल्लंघन पर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। ये मसौदा नियम 18 फरवरी तक सार्वजनिक परामर्श के लिए खुले रहेंगे और उसके बाद अंतिम रूप से तैयार किए जाएंगे।
बच्चों के डेटा के लिए माता-पिता की मंजूरी जरूरी
मसौदे में यह प्रावधान है कि बच्चों के डेटा का उपयोग करने से पहले माता-पिता की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए एक तंत्र बनाया गया है, ताकि किसी व्यक्ति की स्पष्ट सहमति प्राप्त की जा सके।
डेटा फिड्यूशियरी की जिम्मेदारी
डिजिटल डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 में डेटा संग्रह और उपयोग करने वाली संस्थाओं को “डेटा फिड्यूशियरी” कहा गया है। इन पर यह जिम्मेदारी होगी कि वे बच्चों के डेटा का उपयोग करने से पहले माता-पिता की सहमति सुनिश्चित करें।
- यह जांचने के लिए सावधानी बरतनी होगी कि जो व्यक्ति खुद को माता-पिता बता रहा है, वह वयस्क है।
- डेटा फिड्यूशियरी को केवल उतनी ही अवधि तक डेटा रखने की अनुमति होगी, जितनी के लिए सहमति दी गई है। इसके बाद डेटा को हटा दिया जाएगा।
ये नियम डेटा की सुरक्षा और बच्चों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं।
