यूरोपीय संघ (EU) की अदालत ने गूगल एंटीट्रस्ट जुर्माना मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कंपनी पर लगाया गया 4.1 अरब यूरो का जुर्माना बरकरार रखा है। अदालत ने माना कि गूगल ने अपने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के जरिए बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का गलत फायदा उठाया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। यह फैसला वैश्विक टेक कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
यूरोपीय आयोग का आरोप था कि गूगल ने स्मार्टफोन निर्माताओं पर अपने सर्च इंजन और अन्य ऐप्स को पहले से इंस्टॉल करने का दबाव बनाया। इससे अन्य कंपनियों को समान अवसर नहीं मिल पाए। इसी वजह से आयोग ने कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया था, जिसे अब अदालत ने भी सही ठहराया है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से डिजिटल बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बड़ी टेक कंपनियों को अपने व्यावसायिक मॉडल में अधिक पारदर्शिता अपनानी होगी। आने वाले समय में यूरोप में डिजिटल नियम और सख्त हो सकते हैं।
FAQ
Q1. गूगल पर कितना जुर्माना लगाया गया है?
उत्तर: ईयू कोर्ट ने गूगल पर 4.1 अरब यूरो का जुर्माना बरकरार रखा है।
Q2. यह मामला किससे जुड़ा है?
उत्तर: यह मामला एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म और प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों से जुड़ा है।
Q3. इस फैसले का क्या असर होगा?
उत्तर: इससे डिजिटल बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बढ़ने और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलने की संभावना है।















